Monday, November 7, 2022


 कुमगढ़ पत्रिका अंक सितम्बर-अक्तूबर, 2022 मा प्रकाशित म्येरी स्वरचित रचना

 

पाड़ै बेटी

 

जौंका सुपिन्या ह्वन्दन,

पढ़ि लिखिक नौकरी पौला,

खाण कमौणा खातिर,

दूर परदेस जौला।

 

यनु हि स्वचिक,

ऐ थै अंकिता भण्डारी चीला,

क्रूर राक्षसुन खत्म करि,

जैंकि जीवन लीला।

 

आबरु बचौणा खातिर,

करि अपणु बलिदान,

पाड़ै बेटी नमन त्वेकु,

तू थै हमारा पाड़ै शान।

 

हर उत्तराखण्डी दु:खी छ,

मिल्युं चैन्दु अंकिता तैं न्याय,

दुराचारियौं तैं फांसी हो,

जौंन करि अति अन्याय।

 

घंघतोळ भि होणु छ?

क्या अदालत करलि न्याय,

दर्जाधारी सब सबूत मिटैक,

फिर करला अति अन्याय।

 

शत् शत् नमन त्वेकु,

पाड़ै बेटी अंकिता भण्डारी,

हृदय सी श्रध्दाजंलि,

तू थै पाड़ै बेटी हमारी।

 

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू

ग्राम: बागी-नौसा, पट्टी: चन्द्रवदनी,

पौ.औ. कुंडड़ी, टिहरी गढ़वाळ,

दूरभाष: 9654972366

दिनांक 05/10/2022

Monday, July 18, 2022

डख्याटगौं,बड़कोट, उत्तरकाशी भ्रमण(16-19 अप्रैल,2022)

 

डख्याटगौं,ड़कोट, उत्तरकाशी भ्रमण

(16-19 अप्रैल,2022)

 

पाड़ की यात्रा कन्नु म्येरु खास शौक छ। पहाड़ खास करिक उत्तराखण्डा पाड़। ब्यो बरात कु न्युतू हो या पाड़ भ्रमण कु क्वी मौका, मैं प्रयास करदु, जरुर जाण अपणा प्यारा पाड़। महानगर की जिंदगी काफी औखि होन्दि छ। मन सदा विद्रोह करिक पाड़, धौळि अर घाट्यौं का मुल्क उत्तराखण्ड जथैं जाण कु करदु छ।  ऊंचा ह्युंचळा सुखिला कांठा, हरा भरा पाड़, प्वथ्लौं कु चुंच्याट, धौळ्यौं कु सुंस्याट, गाड गदन्यौं मा बग्दु पाणी, पाड़ कु लोकजीवन अति मनोहारी लग्दु छ। मेरी जिज्ञासा सदा मैकु प्रेरित करदि छ, मन मा बस्यां पाड़ भ्रमण की।

 

देवभूमि उत्तराखण्ड तैं देखौं, उड़िक अनंत आगास सी,

हरा भरा पाड़ तैं निहारौं, जैक गाड गदन्यौं का पास सी।

 

 सन् 1803 मा हमारा जयाड़ा बंधु ग्राम-झनाऊं, चंद्रवदनी, टिहरी गढ़वाळ बिटि पलायन करिक डख्याटगौं, बड़कोट, उत्तरकाशी पलायन करिक गयन। चंद्रवदनी क्षेत्र मा हमारा आज तीन गौं नौसा-बागी, पबेला छन। चंद्रवदनी हमारी कुलदेवी छ। अप्रैला मैना हर साल डख्याटगौं मा चंद्रवदनी मेळा अर रामलीला कु आयोजन होन्दु छ। भै बंध हर साल मेळा मा शामिल होणा खातिर हम्तैं बुलौन्दा छन। हम्न कार्यक्रम बणाई अर देरादूण बिटि 16/04/2022 कु सुबेर दस बजि डख्याटगौं का खातिर प्रस्थान प्रस्थान करि। सफर का साथी श्री गोबिन्द सिंह जयाड़ा अर भुला दर्मियान सिंह जयाड़ा  था।    श्री दर्मियान सिंह गाड़ी चलौणा था अर हम प्रकृति की रौनक देखण लग्यां था। रायपुर, सहस्रधारा क्षेत्र का बाद मसूरी की चढ़ाई शुरु ह्वेगे थै।  हम्न गाड़ी मा पेट्रोल भरौण थौ पर मसूरी सी पैलि एक पेट्रोल पम्प मिलि जू बंद थौ।  सड़क भौत व्यस्त ह्वयिं थै किलैकि लगातार चार दिन की छुट्टि थै।   दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश  की गाड़ी भौत नजर औणि थै।  मसूरी सी पैलि पश्चिम दिशा मा हमारी गाड़ी कैम्पटी फाल बाईपास जथैं मुड़ी।  

 

लगभग एक घंटा बाद हम कैम्पटी फाल पौंछ्यौं अर एक पेट्रोल पम्प फर हम पेट्रोल भरौणा खतिर लैन मा लग्यौं।  पेट्रोल पम्प वाळान सिर्फ पांच सौ रुप्या कु हि पेट्रोल दिनि।  मन मा चिंता होण लगि अब पेट्रोल कख मिललु? मसूरी भौत खूबसूरत हिल स्टेशन छ।  कैम्पटी फाल क्षेत्र मा जाम की स्थिति थै।  ठंडु मठु हमारी गाड़ी अग्वाड़ि बढ़ण लगिं थै।  पाड़ मा पर्यटक रुपी बिन बुलैयां मैमान ऐ जान्दन अर भारी अव्यवस्था सी ह्वे जान्दि छ।  गाड़ी मोटर अर अथाह सैल्वानी कैम्पटी फाल क्षेत्र मा नजर औणा था।  अब हम उतराई का रास्ता यमुना पुल जथैं जाण लग्यां था।  गर्मी कु मौसम होणा कारण डांडा रुखा सी नजर औणा था।  कुछ देर का बाद हम यमुनोत्री हाईवे पौंछ्यौं अर अब हम नैनबाग की तरफ जाणा था। सड़क कम चौड़ी होणा कारण भुला दर्मियान सिंह गाड़ी आराम सी चलौणु थौ।  कुछ देर बाद नैनबाग पौंछिक हम्न गाड़ी मा पेट्रोल भराई अर मन की चिंता दूर ह्वे। 

 

भुला दर्मियान सिंह न इच्छा बताई कि अब कखि खाणौ खाण।  नैनबाग बिटि अब हम डामटा की तरफा जाणा था।   कुछ देर बाद डामटा पौंछण फर हम्न एक चौहान होटल का अग्वाड़ि गाड़ी रोकी अर भोजन करि।  वेटर बड़ा प्यार सी पूछि पूछिक हम्तैं भोजन करौणु थौ।  मैंन वे तैं गौर सी देखि, यनु लगणु थौ जन वेकी  घूंट लगैयीं हो। जिज्ञासा वश मैंन वे तैं पूछि, आपकु नौं क्या छ अर घर कख छ? वेन बताई मैं उत्तर प्रदेश कु छौं अर म्येरु नौं शंभुनाथ छ।  वेकी हिमाचली ट्वप्लि पैरिं थै अर शक्ल मा जौनसारी सी लगणु थौ।  कुछ देर बाद हम्न बर्नीगाड की तरफ प्रस्थान करि।  मौसम कुछ ठंडु होण लग्युं थौ अर आगास मा बादल अर बथौं।   लगभग छ बजि हम बड़कोट बजार पौंछ्यौं, वेका बाद यमुनोत्री हाईवे बिटि नीस यमुना पुल राजगढ़ी मार्ग की तरफ डख्याटगौं का खातिर मुड्यौं। अनमोल जयाड़ा हमारी जग्वाळ कन्न लग्युं थौ।  वू अब हमारी गाड़ी का पिछ्नैं चन्न लग्युं थौ।  टट्वा का ऐंच पौंछण फर हम्तैं एक बुजुर्ग नजर ऐन, हम्न गाड़ी रोकिक अर वूं तैं अपणि गाड़ी मा बैठाई।  टट्वा मा हमारा जयाड़ा बंधु रन्दा छन, ये कारण सी मैंन गाड़ी रुकवाई। परिचय कु दौर चलि त पता लगि आप श्री लीला सिंह जयाड़ा छन। कुछ देर बाद हम गौं का नीस पाणी का धारा का नजिक रुक्यौं।  भुला दर्मियान सिंह न गाड़ी ठीक जगा फर पार्क करि अर वेका बाद हम श्री अनमोल जयाड़ा दगड़ि वूंका घर फर पौंछ्यौं।

 

रिमझिम बरखा शुरु ह्वेगे थै। हम्न श्री कुशाल सिंह अर श्री रुकम सिंह जयाड़ा जी सी मुलाकात करि। छ्वीं बात कु दौर चलि अर वेका बाद हम्न भोजन करि।  मन मा रामलीला देखण की चाह थै, ये वास्ता हम रात 9 बजि रामलीला मंच फर पौंछ्यौं अर रामलीला देखि।  सीता हरण कु दृष्य थौ।  मारीच ब्वन्न लग्युं थौ, हे! रावण, अब मैं फर बुढ़ापु ऐगि अर मैं फर अब समर्थ नि रैगि।  कलाकार सुंदर अभिनय करिक जीवंत ऐसास करौणा था।  रामलीला समिति न मैकु मंच फर बुलाई अर मैंन अपणि एक गढ़वाळि रचना तीन पराणिसुणाई।  ठंड कु ऐसास भौत होणु थौ, श्री विपुल जयाड़ा उप-प्रधान जिन मैकु अपणि जैकेट दिनि अर ठंड सी कुछ बचौ ह्वे।  हम दिन का सफर करिक कुछ थक्यां था। लगभग रात 11 बजि हम श्री अनमोल जयाड़ा का आवास फर अयौं अर सेग्यौं।

 

रात कु खूब निंद आई अर 17/04/2022 कु सुबेर भैर प्वथ्लौं कु चुच्यांट सुणिक म्येरी निंद बिजि।  मैं झट्ट भैर अयौं अर पाड़ मा सुबेर प्रकृति कु सौंदर्य, गौं अर गौं का लोक जीवन की झलक, दख्याटगौं बिटि दूर बड़कोट घाटी, हरा भरा पाड़ मनमोहक लगण लग्यां था।  यात्रा फर जाण कु मतलब, संस्कृति, प्रकृति अर लोक-जीवन की झलक देखण कु मौका।  मैंन मोबाईल कैमरा सी पूरा क्षेत्र की विडियो बणाई।  कुछ देर बाद हम नहे धुयेक अर नश्ता करिक श्री सकलचंद जयाड़ा जी का घौर गयौं अर वेका बाद सड़क मा पौंछ्यौं।  हमारा दगड़ि श्री सकलचंद जयाड़ा जी अर रुकम सिंह जयाड़ा जी था।  गाड़ी मा बैठिक हम्न राजगढ़ी का खातिर प्रस्थान करि।  पिछला  द्वी भ्रमण का दौरान मैं ऐतिहासिक राजगढ़ी तैं नि देखि सकि थौ। अबरि दां म्येरी हार्दिक इच्छा थै, पुरातन राजा की गढ़ी जरुर देखौं। 

 

राजगढ़ी पौंछिक हम केन्द्रीय विद्यालय परिसर ह्वेक श्री जयवीर सिंह जयाड़ा जी का घर की तरफ जाण लग्यां था।  जयवीर भैजि न राजगढ़ी तैं सड़क मार्ग सी जोड़ी, केन्द्रीय विद्यालय भी बणवाई, जैका खातिर भूक हड़ताळ भि करि। जयवीर भैजि बतौन्दन अब म्येरु लक्ष्य छ, बड़कोट बिटि राजगढ़ी तैं रज्जू मार्ग सी जोड़नु।   जब हम जयवीर भैजि का घर फर पौंछ्यौं त वूंन हम्तैं गौळा लगाई अर हैंसिक हमारु स्वागत करि।  परिवार का लोगु तैं मिलिक अब हम बैठक मा बैठ्यौं।  काफी देर बातचीत कु दौर चलि अर वेका बाद हम्न भोजन करि।  दिन का लगभग 12 बजिगे था, वेका बाद हम राजा की गढ़ी देखण गयौं। गढ़ी का गेट फर कंडाळि जमीं थै।  मुख्य द्वार बिटि हम्न भीतर प्रवेश करि त देखि, पूरी गढ़ी अब जीर्ण ह्वेगि अर टूटि फूटिगि।  जिज्ञासा वश मैंन जयवीर भैजि सी गढ़ी की दशा फर बातचीत करि। भैजि न बताई, मैंन राजा अर सांसद मानवेन्द्र शाह जी कू बोलि थौ, आप यीं जगा फर  एक भवन बणै देवा जू जंता का काम आलु पर वूंन गौर नि करि।

 

दिन का एक बजिगे था अब हम्न दख्याटगौं का खातिर प्रस्थान करि।  गौं का ऐंच चंद्रवदनी मंदिर मूं रुकिक हम्न माता का दर्शन कर्यन अर पगडंडी मार्ग सी पैदल गौं का खातिर प्रस्थान करि।  बाटा मा हमारी मुलाकात श्री गुरुदेव सिंह जयाड़ा जी सी ह्वे।  गुरुदेव जी आई.टी.बी.पी. मा सेवारत छन अर मेळा का खातिर गौं अयां था। गुरुदेव जी का आवास फर कुछ देर रुकिक हम गौं का बीच तटेश्वर महादेव जी का मंदिर परिसर मा पौंछ्यौं।  मेळा की तैयारी होण लगिं थै।  पारंपरिक परिधान मा सजि धजिक गौं का लोग अर रिस्तेदार मेळा मा औण लग्यां था।  बेटी ब्वारियों का गौळा मा सोना का तिमाण्यां पैर्यां था जू भौत सुंदर लगण लग्यां था।  पैलि हमारा क्षेत्र मा ब्यौलि तिमाण्यां पैरदि थै अब या परंपरा खत्म ह्वेगि।  तटेश्वर महादेव की डोली नाचण लगिं थै, नौना, बाळा, बेटी ब्वारि अर बैख पारंपरिक अंदाज मा झुंग्टा मारिक नाचण लग्यां था।  अलौकिक दिव्य सांस्कृतिक मेळा की झलक अति सुंदर लगणि थै।  कुछ देर बाद हम्न प्रदीप जयाड़ा, श्री लीला सिंह जयाड़ा जी का घर मा बैठिक अथित्व कु आनंद ल्हीक ब्याख्नि बग्त रुकम सिंह जयाड़ा जी का घर पौंछ्यौं। भोजन करिक हम रात कु सेग्यौं।  थकावट का कारण हम रामलीला देखण नि जै सक्यौं।

 

सुबेर 18/04/2022 कखि दूर तीतर कु बासणु सुणिक मैं भैर अयौं।  गौं का नीस ग्यूं की सार हरी भरीं दिखेणि थै।  दख्याटगौं का सब्बि मकान पुराणा अर पारंपरिक छन।  बीच गौं मा तटेश्वर महादेव जी कु भव्य मंदिर छ।  ज्यादातर मकान नीमदरीनुमा छन जौं फर सुंदर कलाकारी करिं छ।  गौं का ऐंच 55 हेक्टयर मा बांज बुरांस कु घणु बण छ।  मन्दिर का नजिक हि द्वी जौळ्यां मगरा छन।  अतीत मा एक साधु गौं मा आई अर वेन एक माता जी सी पाणी मांगी।  माता जिन ब्वलि मैं अब्बि धारा बिटि पाणी ल्हौन्दु।  धारु दूर होण का कारण पाणी ल्हौण मा देर ह्वेगि।  साधु न द्वी जगा फर चिमटा की कच्चाग मारी अर वख बिटि द्वी पाणी का धारा बगण लगिन जु आज मगरा का रुप मा छन. गौं वाळौंन एक मंदिरनुमा भवन बणैक वेका भीतर द्वी मगरा सुरक्षित कर्यां छन अर वख मूं कपड़ा धोणु अर नहेणु वर्जित कर्युं छ। 

 

सबसी पैलि हम नश्ता करि अर श्री आलोक सिंह जयाड़ा असिस्टेंट कमान्डेट, आई.टी.बी.पी. का घर गयौं।  जब हम घर का नजिक पौंछ्यौं त हम्न देखि वख मूं सरकारी स्कूल का चौक मा बच्चा रामलीला का खातिर बांदर इत्यादि की वेशभूषा मा सज्यां धज्यां था।  आज रामलीला कु अंतिम दिन थौ अर राजगद्दी कु मंचन होण थौ।  श्री आलोक का घर मा जैक हम्न कुछ पक्वांन खैन अर फिर गौं जथै लौटिग्यौं। वेका बाद हम  श्री पंकज जयाड़ा का घर फर गयौं।  श्री जबर सिंह जयाड़ा, श्री भजन सिंह जयाड़ा अर श्री जगमोहन सिंह जयाड़ा जी दगड़ि मुलाकात ह्वे।  श्री जबर सिंह जयाड़ा जी का सुपुत्र श्री धीरेन्द्र सिंह जयाड़ा अबरि भारतीय वायु सेना मा विंग कमान्डर छन।  श्री भजन सिंह जी का बड़ा बालका डाक्टर छन अर श्री जगमोहन सिंह जयाड़ा जी का सुपुत्र श्री पंकज उत्तराखण्ड पुलिस, नई टिहरी मा कार्यरत छन।  कुछ देर रुकण का बाद हम श्री कुशाल सिंह जयाड़ा जी का घर गयौं।  पंकज जयाड़ा न हम्तैं शाम का भोजन कु निमंत्रण दिनि। श्री कुशाल सिंह जी का घर फर रुकिक हम्न कुछ पक्वांन खैन अर वेका बाद श्री सकलचंद जयाड़ा जी का घर फर गयौं।  हरेक भै बंध हम्तैं अपणा घौर बुलौणा था अर हम अथित्व कु आनंद लेणा था। 

 

अब रामलीला शुरु ह्वेगे थै, अर चौक मा तटेश्वर महादेव की डोली नाचण लगिं थै।  मेळा की रंगीन रौनक अति स्वाणि लगणि थै।  मर्द अर जनाना झुंग्टा मारिक गोळ घेरा मा नाचण लग्यां था।  पारंपरिक मेळा की झलक अति सुंदर होन्दि छ।  रौ रिस्तेदार भी मेळा मा शामिल होण कु अयां था।  श्री छौन्दाड़ा सिंह जयाड़ा जी सी पिछली रात हमारी मुलाकात ह्वे थै। आज फिर हमारी मुलाकात ह्वे, श्री छौन्दाड़ सिंह हम्तैं मेळा का नजिक हि एक पारंपरिक घर मा ल्हिग्यन अर हमारी मैमानदारी करि।  हम्तैं श्री छौन्दाड़ सिंह जयाड़ा जी तैं मिलिक अति खुशी कु ऐसास ह्वे।  मैमान कु यथ्गा आदर सत्कार मैंन अपणि जिंदगी मा कखि नि देखि, हम्न बोलि हम भै बंध छौं, ये वास्ता आप हम्तैं मैमान न समझा। ब्याखुनि बग्त हम मेळा देखिक श्री अनमोल जयाड़ा का घर फर अयौं।

 

ब्याख्नि कु बग्त ह्वेगे थौ, हम तैयार ह्वेक पंकज जयाड़ा का घर गयौं।  मकान देवदार की लकड़ी कु भव्य नीमदरी की तरौं बण्युं थौ।  भोजन कन्न का खातिर हम सीड़ी चढ़िक ढै़पुरा की तरफ गयौं अर वख हम्न खाणौं पेणौं खाई।  अथित्व सम्मान पूर्वक ह्वे अर भौत भलु लगि।  भै बंधु कु प्यार आत्मीयता सी मिन्नु थौ।  भोजन कन्न का बाद हम श्री अनमोल जयाड़ा का घर अयौं अर सेग्यौं।

 

19/04/2022 कु सुबेर उठिक हम्न देरादूण वापिस जाण की तैयारी शुरु करि।  चाय पेण का बाद हम श्री सकलचंद जयाड़ा जी का यख गयौं।  राजगढ़ी बिटि श्री जयवीर सिंह जयाड़ा जी हम्तैं विदा कन्न कु ऐन।  अब हम सड़क की तरफ अयौं अर श्री जयवीर भैजि अर श्री सकलचंद भैजि हम्तैं छोडण ऐन।  अब विदाई कु भावुक समय ऐगि थौ, हम्न द्वी भैजियौं तैं प्रणाम करिक बड़कोट का खातिर प्रस्थान करि।  श्री लीला सिंह जयाड़ा भि हमारा दगड़ि बड़कोट तक ऐन अर हम्तैं श्री उपेन्द्र सिंह जयाड़ा जी का घर ल्हिग्यन।   निमंत्रण का अनुसार श्री उपेन्द्र भैजि न हम्तैं भोजन करवाई। मैंन भैजि तैं अपणु पैलु गढ़वाळि कविता संग्रै अठ्ठैस बसंत सपिरेम भेंट करि।   दिन का लगभग बारा बजिगे था,अब देरादूण का खातिर हम्न प्रस्थान करि।   यमुना घाटी भौत गर्म थै, बर्नीगाड पौंछिक हम्न हात मुक्क ध्वे अर भुला दर्मियान सिंह न अपणि गाड़ी की धुलै करि। 

 

डामटा, नैनबाग होन्दु अब हम कैम्पटी फाल की तरफ गयौं।   कैम्पटी सी पैलि एक जगा रुकिक हम्न एक पाणी कु छौडु़ देखि।  उत्तराखण्ड का जगा जगा बग्दु पाणी दिखेन्दु।  पर्यटक ये कारण यख औण का खातिर आकर्षित होन्दा छन।  पर्यटक पाड़ मा कूड़ा भी फैलौन्दा छन जू भलि बात निछ।  कुछ देर रुकणा बाद हम कैम्पटी फाल, मसूरी, देरादूण की तरफ गयौं।  गर्मी होण का कारण मौसम साफ नि थौ।  हर जगा धुयेंरु सी लग्युं थौ।   सहस्रधारा, रायपुर होन्दु हम ब्याखुनि बग्त चार बजि अपणा जयाड़ाज फास्ट फूड रेस्टोरेन्ट बालावाला पौंछ्यौं।   यात्रा हमारी सुखद रै अर भौत आनंद ऐ। 

 

भविष्य मा हमारी बिमरु गौं, पीपलकोटी, चमोली अर गंगी गौं घूत्तू जाण की इच्छा छ।  पाड़ की यात्रा कन्नु परम सौभाग्य की बात छ।  राजि खुशी रौला, जरुर बग्त बग्त फर अपणा प्यारा मुल्क उत्तराखण्ड जौला। देवभूमि चारधाम भ्रमण की भी अति इच्छा छ।  जग्वाळ मा छौं, रिटैर ह्वेक चारधाम यात्रा फर भि जरुर जाण। 

 

जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू

नौसा-बागी, चंद्रवदनी,

टिहरी गढ़वाळ।

दूरभाष: 9654972366

Thursday, May 5, 2022

डख्याटगांव भ्रमण (16-19 अप्रैल,2022)

 


पहाड़ की यात्राएं करना मेरा खास शौक है।  पहाड़ में विशेषकर उत्तराखण्ड के पहाड़।  14-17 अप्रैल, 2022 तक मेरी चार दिन की छुट्टियां होने के कारण मैंने 18/04/2022 से 25/04 तक की छुट्टियां ली और कार्यालय से मूलचंद के लिए प्रस्थान किया।  मेरे साथ मेरे कार्यालय के साथी श्री नवीन थपलियाल भी मूलचंद पर मुझे मिले।  वहां पर हमनें पुत्र मनमोहन सिंह जयाड़ा का इंतजार किया।  लगभग सांय के चार बज चुके थे।  थोड़ी देर बाद मनमोहन गाड़ी लेकर मूलचंद पहुंचा और गाड़ी में तेल भरवाकर 4.20 सांय हमनें देहरादून के लिए प्रस्थान किया।  सराय काले खां से हमनें दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस का रास्ता पकड़ा और हमारी गाड़ी फराटे भरते हुए चल रही थी।  प्रधान मंत्री मोदी जी के लिए लोग जो भी कहें, लेकिन आरामदायक राजमार्ग से यात्रा करना अब आनंदमय हो गया है। 

 

               हमें भानियावाला अपने परिवार के अनुज श्री आनंद सिंह के मेंहदी कार्यक्रम में शामिल होना था।  बिना रुके हम चार घंटे में भानियावाला पहुंच गए और कार्यक्रम में शामिल होने पर सकून सा मिला।  अमेरिका से आए हुए प्रिय अनुज जगमोहन सिंह जयाड़ा से कई वर्ष बाद मिलने का सौभाग्य मिला। सभी भाई बंधु गांव हो या शहर से शादी में शामिल होने आए थे।  सबसे वहां पर मिलकर खुशी का अहसास हुआ।  अनुज दर्मियान सिंह गांव से आया हुआ था। जयाड़ा बंधु श्री सकलचंद जयाड़ा व जयवीर सिंह जयाड़ा जी का हमें मेले में आने का निमंत्रण था।  स्नेहवश हम भी मेले में शामिल होने के लिए उत्सुक थे। हमारा पहले से दख्याटगांव, बड़कोट, उत्तरकाशी जाने का कार्यक्रम तय था। देर रात तक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद मैं छोटे समधि श्री सुरेद्र सिंह बिष्ट जी के घर बालावाला पहुंचा। 

 

               14 अप्रैल सुबह उठने के बाद नहा धोकर मैं अपने फास्ट फूड रेस्टोरेंट, जयाड़ाज फूड कोर्ट गया और बड़े पुत्र से मुलाकात की।  देहरादून में मुझे सुखद अहसास हो रहा था।  प्रदूषित दिल्ली के वातावरण से अलग देहरादून का वातावरण बहुत सकून देता है।  मुझे इंतजार है, 31 जुलाई, 2023 आए और सेवानिवृत्त होकर मैं देहरादून आऊं और जब मन करे उत्तराखण्ड की वादियों में भ्रमण करुं, गढ़वालि कविता, कहानियों का सृजन करुं।  मेरे मन की चाह सदा रहती है देवभूमि उत्तराखण्ड को देखूं, उड़कर अनंत आकाश से, नदी पर्वतों को निहारुं, जाकर बिल्कुल पास से”.  दिन भर देहरादून में रहने के बाद मैं सांय पांच बजे भानियावाला पहुंचा और बरात में  शामिल हुआ।  बरात ने लगभग सात बजे रुड़की के लिए प्रस्थान किया।  देहरादून में आंधी चल रही थी।  हमारी बस जैसे ही हरिद्वार के पास पहुंची, बरखा शुरु हो गई।  वातावरण ठंडा होने से बहुत ही अच्छा लग रहा था।   रुड़की से मुज्जफरनगर रोड पर लगभग नौ बजे रात्रि बरात होटल गोदावरी पहुंची।  वहां पर भव्य व्यवस्था की गई थी।  सकून के साथ मित्रों संग बैठकर शादी समारोह का खूब आनंद लिया।  रात को मैं, दर्मियान सिंह और बड़े भाई श्री गोबिन्द सिंह होटल के एक कमरे में सो गए। 

 

               सुबह पांच बजे मैं जाग गया, दर्मियान सिंह और बड़े भाई साहब सो रहे थे।  दर्मियान सिंह को देर तक साने की आदत है।  कुछ देर बाद भाई गोबिन्द सिंह जयाड़ा भी उठ गए।  दर्मियान सिंह को जगाया तो कहने लगा बरात ग्यारह बजे तक जाएगी, मैंने उसे बताया बरात सात बजे प्रस्थान कर जाएगी।  मैं नीचे बेसमेंट में गया, वहां सभी नाश्ता कर रहे थे।  मैं कमरे में आया और दोनों भाईयों को कहा, बरात जाने वाली है।   आप फटाफट हाथ मुंह धो लो।  दोनों ने देर कर दी, हम बेसमेंट में आए तो कोई भी बराती नजर नहीं आ रहा था।  समझ में आया, बरात जा चुकी है।  होटल से हम रुड़की बस अड्डे आए और हरिद्वार की बस पकड़ी।   एक घंटे में हम हरिद्वार पहुंचे फिर देहरादून की बस पकड़ी।  चालीस मिनट का सफर करने के बाद हम भानियावाला फ्लाई ओवर पर उतर गए।

 

               अब हम पैदल भानियावाला दुर्गा चौकी की तरफ चलने लगे।  भाई गोबिन्द सिंह जी कहने लगे, यहां पर राम गोपाल भट्ट जी रहते हैं उनके आवास पर चलते हैं।  मुख्य सड़क से कालोनी की सड़क पर मुड़ने के बाद उनका चौथा घर था।  जब हम घर पर पहुंचे तो लिखा हुआ था अठुरवाला।  गोबिन्द भाई साहब को लगा हम गलत घर में जा रहे हैं।  राम गोपाल जी आंगन में बैठे हुए थे, उन्होंने आवाज लगाई, अंदर आओ।  कई साल बाद भट्ट जी से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।  पंडित जी आत्मीयता से हमारे संग बात कर रहे थे। खूब आदर सत्कार सहित पंडित जी ने भोजन करवाया।  सायं के सात बज चुके थे, भट्ट जी के सुपुत्र डाक्टर साहब ने हमें चाचा दर्शन सिंह के आवास पर छोड़ा। कुछ देर बाद दर्मियान सिंह हमें वेडिंग प्वाईंट ले गया।

 

               रात्रि लगभग नौ बजे तक सभी परिजन एवं मेहमान आ चुके थे।  कहीं पर लोग बैठकर घूंट लगाकर आनंद ले रहे थे।  एक कोने में मण्डाण लगा हुआ था, सभी उल्लास से नाच रहे थे।  सभी से मुलाकात हो रही थी। मेरा सुपुत्र चंद्रमोहन सिंह, मनमोहन सिंह जयाड़ा, दोनों बहुएं और तीना नातिन औन नाति दग्लु भी देहरादून से पहुंच चुके थे।   बहुत ही अच्छा लगता है जब कार्यक्रम के बहाने अपनों से मुलाकात होती है, नहीं तो मुलाकात का समय किसके पास है, इस आधुनिक दौर में।  रात को हम वेडिंग प्वाईंट के कमरे में सो गए।

 

               आज 16 अप्रैल, 2022 को हमें डख्याटगांव जाना था। सुबह उठकर हमनें सीधे देहारादून के लिए प्रस्थान किया।  समधि जी के आवास पर पहुंचकर स्नान करने के बाद हमनें नाश्ता किया ।  लगभग दस बज चुके थे, हमनें रायपुर की ओर प्रस्थान किया। सहस्रधारा से होते हुए हम राजपुर रोड पहुंचे।  हम दर्मियान सिंह को गाड़ी में पेट्रोल भरने के लिए कह रहे थे।  मसूरी पहुंचने पर एक पेट्रोल पंप दिखा तो वह बंद था।  मसूरी से पहले बाएं हाथ को हमनें कैम्पटी फाल का बाईपास वाला रास्ता चुना।  काफी देर बाद हम कैम्पटी पहुंचे तो वहां वाहनों का तांता लगा हुआ था।  रेंग रेंग कर हमारी गाड़ी आगे बढ़ी। चार दिन का सार्वजनिक अवकाश होने के कारण पर्यटकों का तांता लगा हुआ था।  रास्ते में एक पेट्रोल पंप मिला, उसने हमें सिर्फ पांच सौ रुपये का पेट्रोल दिया।  अब हम चिंतित हो गए, आगे कहां मिलेगा पेट्रोल?  दर्मियान सिंह के दांत में दर्द था, वह गाड़ी धीरे चला रहा था।  कैम्पटी से उतर कर हम यमुनोत्री मार्ग पर चलने लगे।  हमें भूख भी लगने लगी थी, नैनबाग पहुंने पर हमनें गाड़ी में तेल भरवाया और डामटा की तरफ चल पड़े।  डामटा पहुंने पर एक होटल के आगे हमनें गाड़ी रोकी।    

 

               होटल में एक हिमाचली टोपी धारी ने हमें भोजन परोसा।  बड़े मधुर अंदाज में वह बात करते हुए हमें भोजन करवा रहा था।  मैं उसे निहार रहा था, कुछ ऐसा प्रतीत हो रहा था, उसने नशा किया हुआ है।  भोजन करने के बाद उससे मैंने उसका नाम पूछा।  उसने बताया, मेरा नाम शंभूनाथ है और में उत्तरप्रदेश का रहने वाला हूं।  दिखने में वो जौनसारी सा ही लग रहा था।  हमनें उसको कहा, आपने सुंदर अंदाज में हमें भोजन करा, आपका शुक्रिया।

 

               दर्मियान सिंह ने गाड़ी स्टार्ट की और अब हम नौगांव की तरफ जा रहे थे।  सड़क काफी संकरी थी, इसलिए दर्मियान गाड़ी प्यार से चला रहा था।  आसमान में बादल लग रहे थे, ऐसा लग रहा था, जरुर वर्षा होगी।  अनमोल जयाड़ा को मैंने फोन किया, हम नौगांव पहुंचने वाले हैं।  उसने बताया मैं आपको यमुनोत्री राजमार्ग से राजगढ़ी जाने वाली सड़क पर मिलूंगा।   लगभग साढे़ छ बजे हम बड़कोट पार करके राजगढ़ी वाली सड़क से यमुना पुल के लिए मुड़े।   अनमोल स्कूटी पर चलने लगा और हम उसके पीछे पीछे।  सड़क बहुत खराब थी।  हम जब टट्वा में पहुंचे तो एक सज्जन हाथ में ठेक्की लेकर आ रहे थे।  मैंने गाड़ी रुकवाई और उन्हें गाड़ी में बिठाया।  अब संवाद हुआ तो उन्होंने अपना नाम लीला सिंह जयाड़ा बताया।  कहने लगे, मेरा एक लड़का ग्राम विकास अधिकारी है।  इतना सुनते ही मैंने कहा, हिमांशु तो नहीं?  लीला भाई ने बताया, हां वही है।  बातचीत करते हुए हम गांव के नीचे पनघट्ट के पास पहुंचे, दर्मियान सिंह ने  गाड़ी रोकी और पार्क की। हमारा बिचार संकलचंद भाई जी के यहां जाने का था।  लेकिन अनमोल ने अपने घर चलने को कहा, जो हम टाल न सके। वर्षा शुरु हो चुकी थी, ठंड का अहसास होने लगा।  अनमोल के पिताजी श्री रुकम सिंह जयाड़ा जी से मुलाकात हुई। उनको मैं अप्रैल, 2015 के भ्रमण के दौरान मिल चुका था।  स्वर्गीय राम किशन जयाड़ा जी के छोटे भाई श्री कुशाल सिंह जयाड़ा जी से भी हमारी मुलाकात हुई। चाय पीने के बाद हमनें भोजन किया और गांव में हो रही रामलीला देखने के लिए प्रस्थान किया।  

 

               मारीच रावण संवाद चल रहा था।  मारीच रावण से कह रहा था, मैं बूढ़ा हो चुका हूं और हिम्मत हार बैठा हूं।  सुंदर अंदाज में सभी अपना किरदार निभा रहे थे।  बहुत साल बाद याने दूसरी बार रामलीला देखने का मौका डख्याटगांव में मिला।  सीता हरण का दृष्य सुंदर अंदाज में प्रस्तुत किया गया।  मुझे मंच पर बुलाया गया और मैंने अपनी एक कविता तीन पराणीसुनाई।  ठंड बहुत थी, उप प्रधान जी ने मुझे अपनी जैकिट पहनने को दी, तब कुछ राहत मिली।   कुछ देर बात हमनें साने के लिए अनमोल के घर को प्रस्थान किया।

 

               सुबह 17/04/2022 को जागने पर मैं बाहर आया तो पक्षियों का चहकना मनोहारी लग रहा था। कहीं तीतर की आवाज, कहीं लोगों की हलचल।  अनमोल के घर की तरफ धूप नहीं थी, लेकिन ऊपर गांव का दृश्य सुंदर लग रहा था।  टटेश्वर महादेव जी का भव्य मंदिर बीच गांव में है।  डख्याटगांट आज भी मूल स्वरुप में है।  यहां भी पलायन हुआ है, लेकिन खेती अभी होती है।   गांव में मेले के कारण बाहर से आए लोगों की वजह से खूब चहल पहल थी।  मैंने कुछ तस्वीरे और विडियो बनाए ताकि यादगार संकलन मेरे पास रहे।  नाश्ता करने के बाद हमनें श्री जयवीर सिंह जयाड़ा जी के आवास राजगढ़ी के लिए प्रस्थान किया।   संकलचंद जी व हम जब राजगढ़ी पहुंचे तो जयवीर भाई जी ने हंसते हंसते हमारा स्वागत किया।  जयवीर भाई के घर से दूर बड़कोट और अन्य क्षेत्र की सुंदरता नजर आ रही थी।  उनके घर के आगे एक भव्य वाटिका है, जहां फूल खिले थे और फुहारा भी।  यहां पर हमनें भोजन किया और कुछ देर बाद राजगढ़ी के लिए प्रस्थान किया। तीसरी बार मैं राजगढ़ी आया था, कोठा देखने की मेरी इस बार इच्छा थी।  जयवीर भाई से मैंने वहां जाने की इच्छा जताई।

              

               यहां पर राजा के जमाने का भव्य भवन था।  आज वह खंडहर हो चुका है और प्रांगण में कड़ाळि जमी हुई है।  मैंने जयवीर भाई से भवन की दुर्दशा के बारे में पूछा।  एक धरोहर की दुर्दशा को मैंने कैमरे में कैद किया।  मैं सोच रहा था, कभी यहां क्या चहल पहल रहती होगी? इस बार मैं मेले की झलक भली प्रकार से देखना चाहता था।  अब हमनें नीचे दख्याटगांव के लिए प्रस्थान किया।  चंद्रवदनी मंदिर में हम कुछ देर रुके।  माता के दर्शन करने के बाद हमनें पगडंडी से गांव के लिए प्रस्थान किया।  दर्मियान सिंह अपनी गाड़ी लेकर गांव के नीचे पार्क करके गांव में पहुंचा।  पिछले भ्रमण के दौरान मैं मेले को भली प्रकार से नहीं देख सका था।  मेला परिसर में पहुंचने पर मैंने देखा मेला शुरु हो चुका था।  स्त्री पुरुष गोल घेरे में नाच रहे थे।  पास ही नीमदरी एवं तिबारीनुमा भवन पर लोग बैठे हुए थे।  जन सैलाब और विभिन्न रंग, वेशभूषा में लोग अति सुंदर लग रहे थे।   मेले की भव्य झलक मन को बहुत मनोहारी लग रही थी। टटेश्वर महादेव की डोली मेले की शोभा बढ़ा रही थी।  मेले के प्रति कितना उत्साह दिख रहा था लोगों में, अवर्णनीय है।  

 

               मेला देखने के बाद हम प्रदीप जयाड़ा के घर गए।  वहां पर भी हमारा खूब मान सम्मान हुआ।  यहां हमें मेहमान के रुप में देख रहे थे, जबकि हम उन्हें कह रहे थे, हम जयाड़ा बंधु हैं।   कुछ देर बैठने के बाद हम श्री लीला सिंह जयाड़ा जी के घर पर गए।  वहां भी खूब खातिरदारी हुई। अब हमें श्री पंकज सिंह जयाड़ा के घर जाना था। पंकज वर्तमान में नई टिहरी पुलिस विभाग में कार्यरत है।   पंकज के यहां  पहुंचकर उनके पिता, ताऊ और चाचा श्री जबर सिंह जयाड़ा, श्री भजन सिंह जयाड़ा व श्री जगमोहन सिंह जयाड़ा जी से मिले और परिचय हुआ।   भै बंधो के गांव में खूब आनंद आ रहा था।  दूर दिल्ली से जिस मकसद से मैं यहां आया था, उसकी पूर्ण प्राप्ति मन को प्रफुल्लित कर रही थी। प्रकृति, संस्कृति दर्शन से क्या आनंद मिल रहा था, निशब्द हूं। यात्राएं जरुर करनी चाहिए, यात्रा करने से सुख की प्राप्ति होती है, और ज्ञान प्राप्ति भी।  सांय को हम अनमोल के घर पर गए और भोजन करने के बाद सो गए। 

 

सुबह 18/04/2022 को उठा तो देखा बाहर धूप आ चुकी थी।  सुबह का समय बहुत ही मनोहारी था।  पक्षियों की आवाज, दूर दिखती घाटी और ऊपर दिखता डख्याटगांव, बहुत ही आकर्षित लग रहे थे।  सुबह सबसे पहले हम आलोक जयाड़ा जी के यहा गए।   वहां पर उनकी दादी जी व ताऊ जी से मुलकात हुई।  सकलचंद भाई हमारे साथ थे।  पास ही स्कूल में बच्चे सज धजकर तैयार हो रहे थे।  पता लगा ये सब रामलीला के लिए तैयार हुए हैं। आज रामलीला में राजगद्दी मंचन था और मेले का अंतिम दिन भी था।  आलोक से मेरा संवाद हुआ, अब वे पदोन्नत होकर आई.टी.बी.पी. में असिस्टेंट कमाडेंट बन गए हैं।   कुछ समय रुकने के बाद हमनें श्री कुशाल सिंह जयाड़ा जी के घर की ओर प्रस्थान किया।

 

कुशाल सिंह जयाड़ा जी की मुझे मिस काल आई थी। मैंने उनसे बात की और घर पर आने का वादा किया।  वादे के अनुसार हम सभी उनके घर पर पहुंचे। वहां पर हमारी खूब आवाभगत हुई।  सभी जयाड़ा बंधुओं का हमें प्यार हमें मिल रहा था।  उधर राजगद्दी की तैयारी चल रही थी।  कुछ समय के बाद हम रामलीला मंच के सामने पहुंचे।  वहां पर बहुत बड़ी भीड़ थी।  राम, लक्ष्मण और सीता, हनुमान सभी मंच पर आए और राज्यभिषेक हुआ।  मेले की रौनक में समय कब कटा पता नहीं लगा।  सांय को हम अनमोल के घर लौट आए और सो गए। अब हमें 19/04/2022 को सुबह देहरादून के लिए प्रस्थान करना था।

 

19/04/2022 को सुबह उठने के बाद हमनें नित्यक्रम से निपटकर जाने की तैयारी शुरु की।  चाय पीने के बाद हमनें श्री सकलचंद जी के आवास की तरफ प्रस्थान किया।  गांव में हमारी मुलाकात श्री उपेन्द्र सिंह जयाड़ा जी से हुई थी।  उन्होंने हमें देहरादून जाते हुए अपने आवास पर बड़कोट में आने का निमंत्रण दिया था।  राजगढ़ी से जयवीर भाई हमें विदा करने के लिए सकलचंद भाई के आवास पर पहुंचे ।  चाय पीने के बाद सकलचंद भाई और जयवीर भाई हमें सड़क तक विदा करने आए।  आते हुए हमनें एक ग्रुप फोटो ली और गले लगकर विदा हुए।  अब हम यमुना पुल की ओर टट्वा को निहारते हुए चल रहे थे।  टट्वा को देखने की मेरी बहुत इच्छा थी, जो इस बार पूरी न हो सकी। डख्याटगांव पीछे छूटता जा रहा था और हम यादों की पोटली लेकर गंतब्य की ओर बढ़ रहे थे।  श्री लीला सिंह जयाड़ा जी हमारे साथ थे।  बड़कोट में वे हमें उपेन्द्र भाई जी के आवास पर ले गए।  उपेन्द्र भाई की वृध्द माता जी आंगन में बैठी हुई थी।  हमनें माता जी को प्रणाम किया और उन्होंने हमें आशीर्वाद दिया।  उपेन्द्र भाई जी से संवाद हुआ और चाय पानी का दौर चला।  नाश्ता तैयार हो चुका था।  हमनें नाश्ता किया और मैंने उपेन्द्र भाई को अपना पहला गढ़वाली काव्य संग्रह अठ्ठैस बसंत भेंट किया।

 

               लगभग दिन के बारह बज चुके थे।  अब हम नौगांव की ओर गाड़ी में जा रहे थे।  बर्नीगाड में रुककर दर्मियान सिंह ने गाड़ी की धुलाई की, क्योंकि वहां पर एक झरना था और सभी लोग वहां पर अपनी गाड़ी धो रहे थे।  गाड़ी धोने के बाद दर्मियान सिंह ने हाथ मुंह धोया और बड़े भाई श्री गोबिन्द सिंह जी ने स्नान किया।  यमुना घाटी में गर्मी बहुत थी।   कुछ देर रुकने के बाद हमनें डामटा नैनबाग की ओर प्रस्थान किया।  अब हम बिना रुके चल रहे थे।  विकास नगर सड़क मार्ग से एक सड़क कैम्पटी फाल, मसूरी के लिए जाती है।  अब हम उस मार्ग पर चल रहे थे। दिन के दो बज चुके थे और चारों ओर गर्म हवा चल रही थी। 

 

कैम्पटी फाल से पहले हम एक जगह पर रुके।  वहां पर गधेरे में एक झरना था।  पास हि एक होटल था वहां पर हमनें गाड़ी खड़ी की और चाय के लिए कहा।  वहां पर बहुत पानी बह रहा था।  होटल वाले को हमनें कहा, आप इसका सदुपयोग करो, यहां घराट लग सकता है या बिजली पैदा करने की टरबाईन।  होटल के नीच उन्होंने फलदार पेड़ लगा रखे थे। यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है।  यहां पर्यटक बहुत आते हैं।  चाय पीने के बाद हमनें मसूरी की ओर प्रस्थान किया।  अब मौसम कुछ ठंडा लग रहा था।  पर्यटकों की हलचल बहुत थी।  मसूरी से सहस्रधारा रोड, रायपुर होते हुए लगभग चार बजे हम अपने रेस्टोरेंट जयाड़ा फूड कोर्ट पहुंच गए।  वहां पर हमनें ममोस खाए और कुछ देर बाद छोटे समधि जी के आवास पर बालावाला पहुंचे।  रास्ते में खिचड़ी बनाने के लिए हम फोन से बता चुके थे। हाथ मुंह धोकर हमनें खिचड़ी खाई और आराम किया। 

 

लगभग सात बजे हमनें भानियावाला के लिए प्रस्थान किया क्योंकि हमें श्री बिक्रम सिंह जयाड़ा के सुपुत्र श्री सूरज जयाड़ा के मेंहदी कार्यक्रम में शामिल होना था।  वेडिंग प्वाईंट पहुंचकर सभी परिजनों से मुलाकात हुई। हर जानकार अपने अंदाज में मिल रहा था, और संवाद भी हो रहा था।  शादी समारोह का आनंद लेने के बाद हम वेडिंग प्वाईंट के कमरे में सो गए।

 

20/04/2022 सुबह उठने पर भाई गोबिन्द सिंह जयाड़ा जी ने बताया मुझे पेचिस लग गई है। शायद बर्नीगाड में नहाने से उन्हें स्वास्थ्य संबंधी तकलीफ हो गई।  वे अपने सुपुत्र संजय जयाड़ा के साथ रायपुर चले गए।  मुझे लेने के लिए मेरा छोटा पुत्र मनमोहन सिंह जयाड़ा आया।  मैंने दर्मियान सिंह को अल्विदा कहा । देहरादून में हम दोपहर तीन बजे हमनें दिल्ली के लिए प्रस्थान किया।  जोगीवाला चौराहे पर हमें दर्मियान सिंह के बड़े सुपुत्र मिले, उन्हें भी  दिल्ली जाना था।  कुछ देर बाद हम बस अड्डे के पास मारुति शो रुम पहुंचे।  पुत्र मनमोहन को मिनि ट्रक खरीदने के लिए कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी थी। ठीक 4.30 बजे हमनें दिल्ली के लिए प्रस्थान किया।  दिल्ली में मुझे द्वारिका में श्री शोबन सिंह जयाड़ा के सुपुत्र की शादी में शामिल होने जाना था।  रात दस बजे हम द्वारिका पहुंचकर शादी में शामिल हुए।  द्वारिकार से  रात लभगभ एक बजे हम अपने आवास संगम विहार पहुंचे।   

 

दर्मियान सिंह के सौजन्य से डख्याटगांव का यादगार भ्रमण हुआ।  दर्मियान सिंह को भ्रमण करने का शौक रहता है।  उसके साथ मैंने 2004 में देहरादून से कालसी, चकरौता, त्यूणी, मोरी, नौगांव, डामटा, नैनबाग, मसूरी का भ्रमण किया था।  अगली मंजिल हमारी पीपलकोटी, बिमरु और घुत्तू के पास गंगी गांव भ्रमण है। ईश्वर से कामना है, हम उत्तराखण्ड भ्रमण करते रहें। 

(जगमोहन सिंह जयाड़ा  जिज्ञासू”, 06/05/2022)



















































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