फिर एग्यैं तुम,
पांच साल पूरा करिक,
अपणि अर प्यारा चम्चौं की,
पापी पोटगी भरिक,
हम सनै क्या मिलि?
तुम सनै वोट दीक.......
अबरीं दां हम,
तुमारी मीठी बातु मा,
बिल्कुल नि औण्या,
उबरी त बोलि थै बात,
आपन मन भरमौण्या,
कथगा करि आपन,
हमारा गौं मुल्क कू विकास,
पिछला पांच साल मा,
गौं खाली ह्वैगी हमारू,
हम होयां छौं निराश.....
कुछ भि बोला,
भलु न ह्वान तुमारू,
तुम्न खाई हमारू,
हम तुम्तैं वोट द्योला,
कतै न रख्यन सारू,
तुम जूठा,अबिस्वासी,
दुबारा जीत कू सुपिनु न देखा,
पाप धोण का खातिर,
चलि जवा तुम अब,
हे नेता जी, गया अर काशी...
(रचनाकार: जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु" )
सर्वाधिकार सुरक्षित एवं प्रकाशित
6.1.2012
www.pahariforum.net
No comments:
Post a Comment