Wednesday, July 12, 2017

सुपिना.....



सुपिना सदानि द्येख्यां चैन्दा,
लग्युं चैन्दु जिन्दगी का,
हर पल अपणा छन,
सुपिना साकार ह्वोन्दा,
भारी खुश ह्वोन्दु मन.....

सुपिना द्येखि साकार करा,
जिन्दगी मा आस भरा,
अपणि मंजिल तै करा,
दुन्यां सी कतै न डरा......

मुसीबत लाख आलि,
बिघ्न बाधा भौत सतालि,
आस कू ल्येणु सारु,
तब सुपिना साकार ह्वोला,
जू कर्दा जिन्दगी मा आस,
कब्बि नि ह्वोन्दा निरास.....

सुपिना द्येखि जिन्दगी चल्दि,
पूरी ह्वोन्दि मन की आस,
जीत वे मनखि तैं मिल्दि,
जैका मन मा ह्वोन्दि आस....

कबरि हमारी जिन्दगी मा,
बग्त यनु भी ऐ जान्दु,
अंध्यारु रुपी छयुं अंधेरु,
ऊजाळु करि दूर ह्वे जान्दु.....

जिन्दगी दिन रात कटणि,
सेळु सी सदानि बटणि,
जू जीत पौन्दु जिन्दगी मा,
सुपिना वेन द्येखि ह्वोला......


-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
  दिनांक 12/7/2017

Tuesday, July 11, 2017

मन की बात बतौणा....



मंग्तु मोळुन माटु खैंडि,
घसण लग्यां खल्याण हमारु,
हे! चुचौं बुरी बितिगी हम फर,
ब्वना, ल्हवा दौं थोड़ी सी दारु। 

कच्ची पक्की जन भी हो,
भारी थौक लगिगी,
मंग्तु मोळु तैं बोन्न लग्युं,
प्वटगि मा आग लगिगी। 

तौं फर भारी दया सी आई,
छक्कि छक्किक पिलाई,
तब बौळेन मंग्तु मोळु,
तमासु तौंन लगाई। 

तीन पराणि यी उत्तराखंडी,
गौं मा मौज मनौणा,
दारु बिगर रै नि सक्दा,
मन की बात बतौणा। 

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू,
दिनांक 5/1/2017, रचना संख्या-1045

बग्त त्येरु आज ब्वारी .....


धौण टोटगि करि ब्वारी,
मोबैल चलौन्दि छ,
टी. बी. फर सीरियल द्येखि,
भारी खुश ह्वोन्दि छ। 

बौण फुंड जान्दि ब्वारी, 
मोबैल दगड़ा ल्हिजान्दि छ,
रिंगटोन बज्दि जब,
भारी खुश ह्वे जान्दि छ। 

बात कर्दि छक्कि ब्वारी,
सुद बुद ख्वे जान्दि छ,
मैत्यौं दगड़ि बात करि,
भारी खुश ह्वे जान्दि छ। 

धाण काज कन्न कू,
मनमौजी ह्वे जान्दि छ,
खाणौं बणौन्दि बग्त ब्वारी,
गीत गुण गुणान्दि छ। 

चिक्कन, ममोस अर चौमिन,
ज्यु भरिक खान्दि छ,
गेर भरे जान्दि जब,
फंसोरिक से जान्दि छ। 

सासू ससुरा जी कू ब्वारी,
मम्मी डैडी ब्वोल्दि छ,
जेठा जी कू भैजि भैजि,
भितर भैर डोळ्दि छ। 

मार्डन हिछ ब्वारी,
स्वचि थौ ह्वलि संस्कारी,
कुछ भी ब्वोलि नि सक्दा,
ह्वयिं छ अति लाचारी,
बग्त त्येरु आज ब्वारी। 

5/7/17

मलेेथा की कूल