Wednesday, November 15, 2017

मूर्ख बणिक मर्द....



अक्ल बंटेणि थै जब,
लगिं थै लंबी लैन,
मर्द लग्यां लैन मा,
जनानि क्वी नि थैन....

भारी अचरज ह्वोण लग्युं,
कख गैन सब्बि जानानि,
पता लगि ब्यूटी पार्लर मा,
बण्नि रुप की खजानि....

ब्यूटी पार्लर बिटि जब,
सब्बि बौड़िक ऐन,
अक्ल बंटेगि थै सब,
मन मा दु:खि ह्वेन....

भटे भटेक रोण लग्यन,
अनर्थ ह्वेगि आज,
हम्त पिछ्नै रैग्यौं,
अग्नै बैख समाज.....

परमेसुर की निंद टूटि,
मच्युं भारी लराट,
पूछि तब जनान्यौं तैं,
किलै ह्वोयुं ऊकताट....

जनानि तब ब्वोन्न लग्यन,
अक्ल हम्तैं भी देवा,
हम जनानि जात छौं,
असगार कतै न ल्येवा....

परमेसुर तब ब्वोन्न लग्यन,
अक्ल सब्बि बंटेगि,
कखन द्येण मैंन अब,
भारी अनर्थ ह्वेगि....

जनानि तब ब्वोन्न लग्यन,
सुणा परमेसुर हमारी बात,
निसाब करा हम दगड़ि,
हम छौं जनानि जात....

परमेसुरन तब बताई,
देणु छौं वरदान,
मुल्ल हैंसल्या जब तुम,
मर्द मूर्ख समान....

एक जनानि ब्वोन्न लगि,
हैंसणु असौंगु काम,
जिंदगी भर रोन्दा छौं,
कब्बि निछ आराम.....

परमेसुरन ब्वोलि तब,
रोणु छ भलि बात,
मर्दु की मति हरण ह्वे जालि,
बात तुमारा हात....

एक जनानि ब्वोन्न लगि,
हैंसणु रोणु कतै नि औन्दु,
झगड़ा करिक काम बणौणु,
सुभौ हमारु होन्दु....

परमेसुरन ब्वोलि तब,
मर्दु दगड़ि जब करल्या झगड़ा,
मर्द तब डरिक रला,
जिन्दगी मा तुमारा दगड़ा....

तीन कळा की धनि तुम,
रोणु, हैंसणु, झगड़ा,
मूर्ख बणिक मर्द सदानि,
रला तुमारा दगड़ा.....

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
दिनांक 15/11/2017

Friday, October 27, 2017

यम ने सोचा होगा



परिचय 
  • बी मोहन नेगी (बृजमोहन सिंह नेगी)
  • जन्म स्थान : चुक्खुवाला, देहरादून
  • जन्म : 26 अगस्त 1952
  • मूल निवासी : पुंडोरी गांव, मनियारस्यूं पट्टी, पौड़ी गढ़वाल
  • पिता : भवानी सिंह नेगी
  • माता : जमना देवी
  • पत्नी : कल्पेश्वरी देवी
  • पुत्र : आशीष, अजय मोहन(विवाहित)
  • पुत्री : शिवानी, हिमानी(विवाहित)
  • जीवनकाल: 26 अगस्त 1952 बिटि 25 अक्तूबर, 2017



महान कवि अर चित्रकार बृजमोहन नेगी जी अब हमारा बीच निछन।  भैजिन देरादूण मा 25/10/17 की रात कु अंतिम सांस लिनि अर अनंत लोक की यात्रा फर चलिग्यन।  म्येरु कविमन भौत ऊदास छ।  भैजि सी म्येरी पैलि मुलकात पौड़ी मा 27 नवम्बर, 2016 कु ह्वे थै। समय समय फर मैं भैजि सी फोन सी संपर्क करदु थौ।  छोट्टा भुला की तरौं मैकु भौत प्यार करदा था।  भैजिन म्येरी कविता तीन पराणि अर ढुंगा हि बण्यां रौला कु कविता पोस्टर बणैक म्येरु उत्साह बढ़ाई।  भगवान बद्रिविशाल जी सी कामना करदु, भैजि की पुण्य आत्मा तैं शांति अर सद्गति द्यौन।



यम ने सोचा होगा.......

यम नगरी में मेरी,
एक कला दीर्घा बनाओ,
धर्ति पर हैं बृजमोहन नेगी,
दूतों उन्हें तुम लाओ.....

आर्थिक संसाधन के अभाव में,
धर्ति पर चित्रकार,
नहीं कर पा रहे हैं,
खुलकर कला श्रृंगार.....

विडंबना देखिए,
सरकार ने नहीं किया सहयोग,
पौड़ी में बना देते कला दीर्घा,
देखते पहाड़ की कला को लोग.....


धर्ति पर कदर नहीं करते,
साहित्य कला का सम्मान,
हुनरवान रह जाते हैं,
चाटुकार पाते हैं मान.....

कह रहा होगा यम,
चित्रकार जी, खूब करो चित्रकारी,
दिखा दो हुनकर कला का,
ये इच्छा है हमारी.....

अब न मिलेगें धर्ति पर,
हमारे प्रिय चित्रकार,
कवियों की कविताओं का,
करते चित्रकारी से श्रृंगार.......

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
27/10/2017
ग्राम- बागी नौसा, चंद्रवदनी,
टिहरी गढ़वाळ।
दूरभाष: 9654972366



यमन स्वोचि ह्वोलु....

यमनगरी मा म्येरी,
एक कला दीर्घा बणावा,
धर्ति मा छन बृजमोहन नेगी,
ऊं तैं झटपट ल्हावा.....

दमड़ि का बिना,
धर्ति मा चित्रकार,
करि नि सकणा था,
खुलिक कला श्रृंगार.....

कनु दुर्भाग्य छ,
सरकार नि करी सहयोग,
पौड़ी मा बणै देन्दा कला दीर्घा,
देख्दा सब्बि ल्वोग.....

धर्ति मा कदर निछ,
साहित्य कला कु सम्मान,
हुनरवान रै जांदन,
चाटुकार पौंदा मान.....

यम ह्वोलु ब्वोन्नु,
नेगी जी, खूब करा चित्रकारी,
दिखै द्येवा हुनर कला कु,
या इच्छा छ हमारी....

अब नि दिखेण धर्ति मा,
स्वर्गवासी नेगी जी चित्रकार,
कवियों की कविता कु,
करदा चित्रकारी सी श्रृंगार.....

शत् शत् नमन अर श्रद्धाजंलि,
आपतैं मान्यवर नेगी जी,
आपका स्वर्गवासी ह्वोण फर,
कविमन दु:खी ह्वेगि जी.....

-जगमोहन सिंह जयाड़ा जिज्ञासू
 27/10/2017
ग्राम- बागी नौसा, चंद्रवदनी,
टिहरी गढ़वाळ।
दूरभाष: 9654972366

मलेेथा की कूल