माँ तेरी याद औन्दि छ
जिंदगी का हर मोड़ फर,
तेरा बिगर आज,
अहसास होन्दु यकुलि छौं,
तेरु साया जबसि उठि,
सदानि मन उदास मेरु,
कना था ऊ बचपन का दिन,
तेरी खुग्ली मा पळि बढ्यौं,
तेरा स्वर्ग जाण का बाद,
मैकु अहसास होण लग्युं,
माँ बेटा कू पवित्र रिश्ता,
तन मन सी गहराई कू,
आज याद तेरी सतौन्दि छ,
माँ तेरी याद औन्दि छ....
मन मा बसिं मेरा आज,
तेरी कुछ बात छन,
जब जब औन्दि याद मैकु,
व्यथित होंदु कविमन,
बड़ा प्यार सी बचपन मा,
मुण्ड मा हाथ फलोसिक,
नह्वै धुवैक लत्ता कपड़ा,
मेरा बदन मा पैरैक,
अपणा हातुन करदि थै,
मेरा तन कू सृंगार,
मेरा खातिर अथाह प्यार,
माँ की ममता,
औलाद का खातिर,
सदा अनोखी होन्दि छ,
माँ तेरी याद औन्दि छ....
तेरा बिना आज यनु लगदु,
जन ह्वै जान्दु मनखि अनाथ,
जीवन मरण सदा सच छ,
पुनर्जन्म मा मिलु फेर साथ,
शत शत नमन, हे माँ त्वैकु,
"जिज्ञासु" का कविमन मा,
हर पल ऊभरदी तेरी तस्वीर,
अब पित्र छैं कृपा रखि,
अनुभूति यनि होन्दि छ,
माँ तेरी याद औन्दि छ....
प्यारी माँ को समर्पित स्वरचित रचना
-जगमोहन सिंह जयाड़ा "जिज्ञासु"
सर्वाधिकार सुरक्षित एवं ब्लॉग पर प्रकाशित
14.9.20012
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